एक तरफ़ा प्रेम

एक तरफ़ा प्रेम…
युवा “अपना घरौंदा” के अति युवा फाउंडर प्रदीप कुमार के कहने पर इस विषय पर अपने विचार रख रहा हूँ। सबसे पहले एक का मतलब एक, तरफ़ा साइड के लिए, और प्रेम तो प्रेम है ही। प्रेम के लिए दो लोग चाहिए, साइड से कुछ नहीं होता, कुंदन का दिल भी टूटा था तो दर्द सेन्टर में हुआ था। अब एक तरफ़ा प्रेम जो है, वो रायता है, जिसे आपने भी फैलाया होगा। जिस रूमानियत के कल्पना लोक में आप जी रहे हैं, वो दशकों पहले बीत चुका है। लोग प्रैक्टिकल हो गए हैं, और उसका उन्हें भी कोई लाभ नहीं है, क्योंकि वो तीस नम्बर का होता है, और दूसरा एक ही बार दिया जाता है। थ्योरी पढ़िए, फेल भी हुए तो अगली बार दीजिये पेपर।
एक कन्वर्सेशन में यह बात उठी की लड़के को प्रेम में सिर्फ लड़की के शरीर से मतलब है। ऐसा नहीं है, कुछ होते हैं, जिन्हें ज़ुल्फ़ संवारना, माथा चूमना और चिट्ठियां लिखना ज़्यादा बेहतर लगता है। एकतरफा प्रेम ने लोगों की नई प्रजाति उत्पन्न की है, जिसे साईकाईट्रिस्ट कहते हैं।
लड़कियों की तरफ से अगर पक्ष न लूं तो मुझे नारी विरोधी समझा जाएगा, इसलिये दो शब्द हमारी बहनों के लिए। “जो चाहा वो न पाया, जो पाया वो न चाहा, जिसके पीछे भागे, वो साया है रे साया” अब जिससे प्रेम होता है, वो निरा बेवकूफ़ निकल जाता है, मतलब निकलने के बाद फोन भी नहीं करता, कई लड़कियों से जुड़ाव रहता है (वो उनकी चॉइस है) और जो इन्हें मिलता है, उसकी परिकल्पना सपने में भी नहीं कि होती। जिंदगी का आधा अध्याय जिंदगी को समझने और उसे झेलते हुए बेहतर कल के सपनों में गुज़रता है, और बाकी का उन सपनों के पूरा न होने के तनावों में, हाथों में आरती की थाल और पैरों में जंजीरों का जंजाल, और इसी में फंसकर न जाने कितने सपने किसी मरघट पर जाकर खत्म हो जाते है। इसका कारण वो एक तरफा प्रेम होता है, जो उन्होंने अपनी जिंदगी से किया होता है, जिसके बदले में उन्हें कुछ भी नहीं मिलता।
अब समय बदल रहा है, लड़कों के लिए जरूरी है प्रेम करो, लेकिन प्रेम न रहने पर प्रेम को नँगा मत करो, कोई बात करना छोड़ दे तो सामने वाली को सरेआम मत करो, गाली मत दो, अनाप शनाप मत लिखो। और अगर आपको कोई कुछ कहे तो मीम बनाओ, उससे वो ज़्यादा हर्ट होगी, और आपकी स्किल निखरेगी।
और लड़कियों का प्रेम दो तरफ़ा ही अक्सर होता है, आपके लिए जरूरी है, बस सही चुनिए, बेरोज़गार मत चुनिए, कवि या लेखक मत चुनिए, एक दिन ये फेमस हो जाते हैं, और फिर आप अपने रोज़ाना दस से छः तक दफ्तर जाने वाले पति को देखकर अवसादी हो जाती हैं। आप अपने सपने पूरे कीजिये, यहां कोई साथ देने वाला नहीं है, रात होने पर साया भी साथ छोड़ देता है।


जोहार।

– विशाल स्वरूप ठाकुर

Author: vishalswaroopthakur

Hindi poet, story teller, author and critic.

One thought on “एक तरफ़ा प्रेम”

  1. एक तरफा प्रेम पर विशाल जी के विचारों का स्वागत है लेकिन यह कुछ अधूरा रह गया,शुरू हुआ तो लड़को के प्रेम से लेकिन इसका समापन कुछ रोमांचक तरीके से संभव था।नदी पर नाव तैराने के बजाए ज़रा गहराई में जाना चाहिए था।बाकी बेहद उत्साहित और नए तरीके का प्रयोग अच्छा था।

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